कोर्ट ने इस मांग को ठीक करते हुए स्पष्ट किया कि भारत "धर्मशाला" नहीं है जो हर किसी को शरण दे सकता है। कोर्ट ने कहा कि जनसंपर्क से संबंधित पीएचडी सरकार द्वारा तय की जा रही है और कोर्ट का इसमें हस्तक्षेप सीमित है।
गरीबों की याचिका में यह भी कहा गया है कि भारत की सीमित सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा पर ध्यान दिया जाना चाहिए, हर विदेशी नागरिक को शरण देना अव्यवहारिक नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि हर शीट पर मानव निर्मित आधार तैयार नहीं किया जा सकता।
यह शरण नीति में भारत की सख्त स्थिति को शामिल किया गया है, जहां प्रत्येक मामले की राष्ट्रीय समीक्षा और सुरक्षा पर नजर रखी जाती है।
विशेषज्ञ का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में आने वाले शरण आवेदनों पर भी प्रभाव डालेगा और सरकार की विदेश नीति आंतरिक एवं सुरक्षा दृष्टिकोण को स्थापित करेगा।
Author: JAN TV Editorial Team
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