एआई टूल्स का बढ़ता असर: इंसानी जुबान और लेखन में आ रहे बदलाव
(India) इंसान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भाषा आपस में जुड़ती जा रही है। जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि ChatGPT जैसे AI टूल्स के आने के बाद हमारी बोलचाल और लिखने का तरीका काफी बदल गया है। इस रिसर्च में करीब 3.6 लाख YouTube वीडियो और 7.7 लाख पॉडकास्ट एपिसोड्स का विश्लेषण किया गया, जिसमें साफ देखा गया कि AI की भाषा में इस्तेमाल होने वाले कुछ खास शब्द जैसे "meticulous" (सावधानी से), "boast" (शेखी बघारना), "realm" (क्षेत्र), और "delve" (गहराई से जानना) अब लोगों की रोजमर्रा की बातचीत में भी ज्यादा इस्तेमाल होने लगे हैं। इस प्रक्रिया को शोधकर्ता “closed cultural feedback loop” कहते हैं, जिसका मतलब है कि मशीनें इंसानों से सीखती हैं और फिर अपनी भाषा के जरिए इंसानों की भाषा को बदलती हैं। यह बदलाव पहले SMS के जमाने की तरह है, जब छोटे-छोटे मैसेज की आदत ने हमारी भाषा को संक्षिप्त और अलग बना दिया था। लेकिन अब इस नई भाषा शैली के चलते सिर्फ शब्द नहीं बदल रहे, बल्कि हमारे विचारों को व्यक्त करने का तरीका भी प्रभावित हो रहा है। Cornell Tech के शोधकर्ता Mor Naaman बताते हैं कि इस बदलाव से हम अपनी भाषाई विविधता, स्वाभाविकता, और सबसे जरूरी इंसानी भावनाएं खोने लगे हैं। हम अब अपनी खुद की भाषा और अंदाज में बात करने की बजाय, उन शब्दों और तरीकों को दोहरा रहे हैं जो AI हमें सिखाता है। इससे हमारी भाषा की असली ताकत, जो इंसानी जुड़ाव और भावनात्मक अभिव्यक्ति से आती है, कमजोर पड़ने का खतरा है। ऐसे में यह जरूरी है कि हम AI की मदद लें लेकिन अपनी अनूठी भाषा और सोच को भी बचाकर रखें।


Author: JAN TV Editorial Team

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