मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई समेत 5 जजों की बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति सलाहकारी अधिकारिता (एडवाइजरी ज्यूरिडिक्शन) में बैठी है, न कि अपील अधिकारिता (अपीलेट ज्यूरिस्डिक्शन) में। कोर्ट यह राय दे सकता है कि कोई फैसला सही नहीं है, लेकिन इससे पुराना फैसला अपने आप खत्म नहीं हो जाएगा। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एक पुराने मामले का हवाला देते हुए कहा कि सलाहकारी अधिकार क्षेत्र में भी कोर्ट किसी फैसले को रद्द कर सकता है। जवाब में चीफ जस्टिस ने कहा, 'राय को बदला जा सकता है, फैसला नहीं।'
Author: JAN TV Editorial Team
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