सुप्रीम कोर्ट: राष्ट्रपति का कोर्ट से सलाह लेना गलत नहीं, कोर्ट केवल राय दे सकता है
(India) सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को राष्ट्रपति और राज्यपालों पर बिलों पर हस्ताक्षर करने के लिए डेडलाइन लागू करने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कहा, 'राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आर्टिकल 143 के तहत कोर्ट से राय मांगना गलत नहीं है।' मुर्मू ने मई में सुप्रीम कोर्ट से राय मांगी थी कि क्या राष्ट्रपति या राज्यपाल विधेयकों पर फैसला लेने में अनिश्चितकाल तक देरी कर सकते हैं या कोई डेडलाइन तय की जा सकती है।

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई समेत 5 जजों की बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति सलाहकारी अधिकारिता (एडवाइजरी ज्यूरिडिक्शन) में बैठी है, न कि अपील अधिकारिता (अपीलेट ज्यूरिस्डिक्शन) में। कोर्ट यह राय दे सकता है कि कोई फैसला सही नहीं है, लेकिन इससे पुराना फैसला अपने आप खत्म नहीं हो जाएगा। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एक पुराने मामले का हवाला देते हुए कहा कि सलाहकारी अधिकार क्षेत्र में भी कोर्ट किसी फैसले को रद्द कर सकता है। जवाब में चीफ जस्टिस ने कहा, 'राय को बदला जा सकता है, फैसला नहीं।'

Author: JAN TV Editorial Team

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