शहर की ऊँचाई पर स्थित तारागढ़ किला बूँदी की पहचान माना जाता है। 14वीं सदी में बना यह किला अपनी विशाल दीवारों, भूमिगत सुरंगों और भव्य द्वारों के लिए मशहूर है। यहाँ से पूरे शहर और झीलों का अद्भुत नज़ारा दिखाई देता है।
किले के पास स्थित बूँदी पैलेस अपनी राजपूत-मुगल स्थापत्य कला और अद्भुत भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। बूँदी की मिनिएचर पेंटिंग शैली, जिसमें प्राकृतिक दृश्यों और दरबारी जीवन का सुंदर चित्रण मिलता है, कला प्रेमियों को खास आकर्षित करती है।
बूँदी को अक्सर "झीलों और बावड़ियों का शहर" कहा जाता है। यहाँ की नवल सागर झील शहर के बीचों-बीच स्थित है और सूर्यास्त के समय इसका नज़ारा मन मोह लेता है। इसके अलावा रानीजी की बावड़ी और अन्य सैकड़ों बावड़ियाँ बूँदी की स्थापत्य कला और जल प्रबंधन की समृद्ध परंपरा को दर्शाती हैं।
बूँदी घूमने का सही समय:-
बूँदी की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और पर्यटक आसानी से किले, महलों और बाजारों की सैर कर सकते हैं।
यदि आप भीड़-भाड़ से दूर किसी शांत लेकिन ऐतिहासिक जगह की तलाश में हैं तो बूँदी एक आदर्श विकल्प है। यहाँ की संकरी गलियाँ, पुरानी हवेलियाँ, रंगीन बाजार और विरासत से भरी हवा हर यात्री को एक अनोखा अनुभव देती है।
Author: JAN TV Editorial Team
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