मुंबई में 2008 में हुए आतंकी हमले की 17वीं बरसी पर, उस हमले में बची देविका रोटावन ने अपनी दर्दनाक कहानी साझा की। वह उस हमले में घायल होने वाली सबसे कम उम्र की महिलाओं में से एक थीं।
देविका ने बताया कि 26 नवंबर 2008 की रात उनके लिए कितनी भयावह थी। वह छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर आतंकियों की गोलीबारी में घायल हो गई थीं। उनके पैर में गोली लगी थी।
"सत्रह साल बीत गए हैं, लेकिन हमारे लिए वो रात वैसी की वैसी ही है। मुझे अब भी ऐसा नहीं लगता कि 17 साल हो गए इस बात को, हर पल-हर एक सेकेंड मैं वो जीती हूं, मेरे पैर में आज भी वो निशान है। वो दर्द उसी तरीके से है।"
देविका बाद में इस हमले के केस में प्रमुख गवाह बनी और उन्होंने हमला करने वाले आतंकियों में से अजमल कसाब की पहचान की थी। उन्होंने कहा कि जब तक हमले के मास्टरमाइंड को सजा नहीं मिलती, तब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिलेगा।
"फिल्म में देखा था कि हीरो को गोली लगती है तो वो अगले दिन ठीक हो जाता है, लेकिन असल ज़िंदगी में ऐसा कुछ नहीं था। गोली लगने के बाद तो मैं बेहोश हो गई थी... सरकार की कार्रवाई से मैं खुश हूं, लेकिन अभी भी जो पाकिस्तान में मास्टमाइंड बैठा है, जब वो खत्म होगा तो लगेगा कि पूरा इंसाफ मिला है।"
26 नवंबर से 29 नवंबर 2008 तक चले इस हमले में 150 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। एकमात्र जिंदा पकड़े गए आतंकी अजमल आमिर कसाब को 2012 में फांसी दे दी गई थी।
Source- PTI
Author: JAN TV Editorial Team
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