लोकसभा में वंदे मातरम् पर चर्चा: पीएम मोदी ने कहा- यहां कोई न पक्ष, न विपक्ष, इस जयघोष ने आजादी के समय सबको शक्ति दी
(India) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने कहा, "इस चर्चा में कोई ना पक्ष और ना कोई विपक्ष है। जिस मंत्र ने, जिस जयघोष ने देश के आजादी के आंदोलन को ऊर्जा और प्रेरणा दी थी। त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था, उस वंदे मातरम् का पुण्य स्मरण करना इस सदन में हम सबका बहुत बड़ा सौभाग्य है।"

वंदे मातरम् का इतिहास

वंदे मातरम् को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम् गाया।

वंदे मातरम् का महत्व

पीएम मोदी ने कहा, "वंदे मातरम् महान सांस्कृतिक परंपरा का आधुनिक अवतार है। बंकिम दा ने जब वंदे मातरम् की रचना की, तो वह स्वाभाविक की स्वतंत्रता आंदोलन का स्वर बन गया। हर भारतीय का संकल्प बन गया।"

वंदे मातरम् और आजादी की लड़ाई

पीएम मोदी ने कहा, "वंदे मातरम् सिर्फ राजनैतिक आजादी की लड़ाई का मंत्र नहीं था। अंग्रेज जाएं और हम अपनी राह पर खड़े हो जाए, वंदे मातरम् सिर्फ इतने तक सीमित नहीं रहा। वंदे मातरम् अपनी मां भारती को उन बेड़ियों से मुक्ति दिलाने का वो पवित्र जंग लड़ा।"

वंदे मातरम् की 150वीं सालगिरह

पीएम मोदी ने कहा, "हमारे लिए गर्व की बात है कि वंदे मातरम् के 150 पूरे होने पर हम इस एतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं। वंदे मातरम् 150 साल की यात्रा कई पड़ावों से गुजरी है।"

Author: JAN TV Editorial Team

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