चैटबॉट ने वीडियो को “पार्किंग लॉट में ताड़ के पेड़ पर चढ़ रहे आदमी” का पुराना फुटेज बताया और अहमद की तस्वीर को इजरायल में बंधक बनाए गए नागरिक से जोड़ दिया। पुलिस और हमलावरों के बीच मुठभेड़ के फुटेज को भी Grok ने साल की शुरुआत में आए चक्रवात का वीडियो बता दिया। इस तरह की गलत जानकारियों ने यूजर्स में गहरा भ्रम और आश्चर्य पैदा कर दिया।
Grok की इस गलती का कारण उसके विश्वसनीय स्रोतों पर निर्भरता और ऑनलाइन गलत सूचनाओं का मिश्रण बताया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना से यह साफ होता है कि अभी भी एआई द्वारा दी गई जानकारी पर पूर्ण भरोसा नहीं किया जा सकता और हमेशा तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
Author: JAN TV Editorial Team
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