पर्यावरण समूहों और Save Aravalli अभियान के लोग इसका विरोध कर रहे हैं — उनका कहना है कि इससे इकोलॉजी, वायु, पानी और जैव विविधता को गंभीर नुकसान हो सकता है।
वही इस विषय पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि नई परिभाषा में कोई “खनन की छूट” नहीं दी गई है और लगभग 90% अरावली क्षेत्र अब भी संरक्षण में रहेगा, इससे खनन पर रोक बनी रहेगी।
लेकिन अरावली को लेकर राजस्थान और हरियाणा में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। बीजेपी और कांग्रेस इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं।
वहीं विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नई परिभाषा और संरक्षण में गड़बड़ी से धूल उड़ान, वायु प्रदूषण, जल संकट और जैव विविधता को खतरा हो सकता है। कई पर्यावरण कार्यकर्ता यह भी कहते हैं कि अगर छोटे-छोटे पहाड़ी ढलान संरक्षण से बाहर हो जाते हैं, तो अरावली की इकोलॉजिकल भूमिका कमजोर हो सकती है।
Author: JAN TV Editorial Team
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