रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आईएनएसवी कौंडिन्य प्राचीन भारतीय जहाज निर्माण परंपराओं से प्रेरित है। इसे पूरी तरह पारंपरिक तकनीकों और सामग्री से तैयार किया गया है। लकड़ी के तख्तों को नारियल के रेशों से बनी रस्सियों से जोड़ा गया है और प्राकृतिक रेजिन से सील किया गया है। यह वही तकनीक है, जिसने आधुनिक नेविगेशन से पहले भारतीय नाविकों को लंबी समुद्री यात्राएं करने में सक्षम बनाया था।
अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना संस्कृति मंत्रालय, भारतीय नौसेना और होडी इनोवेशन के बीच त्रिपक्षीय समझौते के तहत शुरू की गई थी। इसका मकसद भारत की स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों और समुद्री विरासत को पुनर्जीवित करना है। आईएनएसवी कौंडिन्य की यह पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा भारतीय इतिहास, शिल्प कौशल और नौसैनिक परंपरा के वैश्विक प्रदर्शन के रूप में देखी जा रही है।
Author: JAN TV Editorial Team
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