चिप युद्ध: चीन की EUV मशीन से पश्चिमी वर्चस्व पर सीधा हमला
(India) चीन ने गुपचुप तरीके से अपनी पहली EUV (एक्सट्रीम अल्ट्रावॉयलेट) लिथोग्राफी मशीन का प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक हथियारों के लिए अत्याधुनिक चिप बनाने में सक्षम होगी। इस प्रोजेक्ट में पूर्व ASML इंजीनियरों की मदद ली गई है, और इसे अमेरिका और पश्चिमी देशों के तकनीकी वर्चस्व को चुनौती देने वाला कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञ इसे मैनहैटन प्रोजेक्ट से तुलना कर रहे हैं, क्योंकि इसकी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा और गोपनीयता बेहद उच्च स्तर की है।
EUV तकनीक इंसानी बाल से भी हजारों गुना पतली सर्किट लाइनों को सिलिकॉन प्लेट पर उकेरने में सक्षम है। फिलहाल इस तकनीक पर दुनिया में केवल डच कंपनी ASML का कब्जा है। चीन की मशीन ने अल्ट्रावॉयलेट लाइट उत्पादन में सफलता हासिल की है, हालांकि अभी वर्किंग चिप बनाना बाकी है। इस पूरे प्रोजेक्ट में हुवावे की मुख्य भूमिका है, और वैज्ञानिकों को हफ्तों तक लैब में ही रहकर काम करना पड़ता है।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि मशीन को पूरी तरह वर्किंग कंडीशन में लाने में अभी समय लगेगा। चीन 2028 तक इससे उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखता है, लेकिन अधिक संभावना है कि यह 2030 तक ही पूरी तरह सक्षम हो। अमेरिका और उसके सहयोगियों ने चीन को एडवांस पार्ट्स बेचने पर पाबंदी लगाई है, जिससे चीन सेकंड-हैंड मार्केट और पुराने पार्ट्स का इस्तेमाल कर अपने प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है।

Author: JAN TV Editorial Team

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