सर्दियों का मौसम स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा माना जाता है, परंतु अपने साथ कुछ समस्याएं भी लाता है। तापमान गिरने के साथ ही वातावरण में वायरस की संख्या भी बढ़ने लगती है, जिससे अधिक प्रभावित होते हैं बुजुर्ग। पढ़ें बचाव के बारे में।
कान में संक्रमण
मौसम का असर कान पर भी पड़ता है। सर्दी की शुरुआत में अकसर इसका पता नहीं चलता। इसके प्रमुख लक्षणों में बुखार होना और कान में तेज दर्द होना प्रमुख है।
क्या है इलाज
जरूरी नहीं कि मरीज में सभी लक्षण दिखाई दें। हो सकता है कि किसी मरीज में केवल दो लक्षण ही हों। कान के अधिकतर संक्रमण वायरस के कारण होते हैं। यह आवश्यक नहीं कि उपचार के लिए एंटीबायोटिक दवाएं ही दी जाएं, लेकिन दर्द से राहत पाने के लिए डीकंजेस्टेंट दवाएं दी जा सकती हैं।
गले का संक्रमण
ठंड के मौसम में गले का संक्रमण बहुत अधिक बढ़ जाता है। सूखी ठंड में यह ज्यादा परेशान करता है। यह वायरस के कारण होता है, जो आमतौर पर 6-7 दिनों में ठीक हो जाता है। लेकिन इतने समय में ठीक न हो तो यह बैक्टीरियल संक्रमण का रूप ले लेता है। ऐसे में समस्या पर विशेष नजर रखनी होती है, ताकि यह गंभीर रूप धारण न कर ले।
क्या है इलाज
शुरुआती संक्रमण में गर्म पानी के गरारे करने से यह ठीक हो जाता है। कई बार एंटीबायोटिक दवा लेनी पड़ती है।
दमा
तापमान में गिरावट, कोहरा, प्रदूषण या वायरल संक्रमण के कारण सर्दियों में सांस की समस्याएं ज्यादा होती हैं। इन समस्याओं में दमा प्रमुख है। इसमें सांस फूलने, सांस से सांय सांय की आवाज आने, पीला या सफेद बलगम आने, खांसी बढ़ जाने और रात को सो न पाने जैसे लक्षण दिखते हैं।
क्या है उपचार
’ दमा रोगी सर्दी की शुरुआत में डॉक्टर के पास जाकर अपनी दवा की मात्रा नए सिरे से निश्चित करवा लें। हो सकता है मौसम में बदलाव के साथ दवा की डोज बढ़ानी पड़े।
’ गर्म कपड़े पहनें और सिर व कान को जरूर ढक कर रखें।
’ दवाएं नियमित रूप से लें।
’ खाने में हल्दी, अदरक, तुलसी, काली मिर्च, केसर आदि का प्रयोग करें।
फ्लू
यह एक प्रकार के वायरस से होने वाली बीमारी है। इसमें तेज बुखार और बदन दर्द, सिर दर्द और गले में दर्द, खांसी आने और कभी-कभी सांस लेने में समस्या होने जैसे लक्षण दिखते हैं।
क्या है उपचार
’ ऐसे लोगों को घर पर रह कर आराम करना चाहिए। जब तक बहुत जरूरी न हो, सार्वजनिक जगहों पर न जाएं।
’ पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का इस्तेमाल करते रहें।
’ साफ-सफाई का ध्यान रखें।
बरतें सावधानियां
’ धूप निकलने के बाद ही सैर करने जाएं। फिटनेस विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार व्यायाम करें।
’ गर्म तरल पदार्थ जैसे चाय, दूध और सूप का प्रयोग करें। अगर पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है तो तरल पदार्थ लेते समय इस बात का ध्यान रखें।
’ डॉक्टर की सलाह से समय रहते फ्लू और निमोनिया का टीका लगवाएं।
’ सांस, हृदय और किडनी के मरीज मौसम के बदलाव पर अपने डॉक्टर की सलाह लें और नियमित दवाएं लें। तरल पदार्थ की मात्रा की भी जानकारी अपने डॉक्टर से अवश्य ले लें।
’ फ्लू जैसी संक्रामक बीमारी के दौरान घर में रहें, ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके।
Author: JAN TV Editorial Team
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