सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि यह सिर्फ एक कानूनी मसला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की पहचान और धार्मिक आज़ादी का सवाल है। उनके मुताबिक, कानून में कई ऐसी खामियां हैं जो वक्फ संपत्तियों की पारंपरिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती हैं और इससे धार्मिक संस्थानों का संचालन भी प्रभावित होगा।
उन्होंने ये भी जताया कि इस कानून से संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार – यानी अनुच्छेद 25 और 26 – पर सीधा असर पड़ता है। उनका कहना था कि वक्फ बोर्ड को मिले कुछ अधिकार इतने व्यापक हैं कि वे न सिर्फ मुस्लिमों को, बल्कि दूसरी धार्मिक या निजी संपत्तियों को भी प्रभावित कर सकते हैं।
कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अगली सुनवाई की तारीख तय की है। अब नज़र इस पर है कि सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है।
Author: JAN TV Editorial Team
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