जान वेइली की 38 मिनट की इस फिल्म में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के खतरों की पृष्ठभूमि में इंसान की, धरती के इस सर्वाधिक उंचे, रूखे, तेज हवाओं वाले और सर्वाधिक ठंडे महाद्वीप पर खोज की ललक को दिखाया गया है । एस्ट्रोविजन 70 के विशाल प्रोजेक्शन सिस्टम के जरिए दर्शक न केवल फिल्म में खो जाते हैं बल्कि वे खुद को फिल्म का एक हिस्सा मानते हैं और अन्य लोगों की तरह अंटार्कटिका पर खुद को घूमते हुए महसूस करते हैं। अंटार्कटिका पर कदम रखने वाली पहली भारतीय महिला वैज्ञानिक प्रोफेसर सुदीप्ता सेनगुप्ता को इस फिल्म को देखकर 1983 के दिनों की याद हो आयी जब उन्होंने दक्षिण गंगोत्री ग्लेशियर में अपना दो महीने का समय बिताया था। उन्होंने कहा कि बर्फ का दूर दूर तक फैला और कभी न खत्म होने वाला विस्तार मेरी आंखों में आज भी समाया हुआ है । हमारे आसपास कोई रंग नहीं थे । केवल नीला आसमान और सफेद बर्फ ।’
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।