(Lucknow, UTTARPRADESH)
इस लहर के सहारे लोकसभा चुनाव में अपनी सबसे बड़ी जीत हासिल करने वाली भाजपा एक बार फिर उसी के बल पर अपना दबदबा साबित करना चाहती है। वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस की नजर भाजपा के इस सबसे बड़े हथियार की धार कुंद करके एक तीर से दो निशाने लगाने पर है। लोकसभा चुनाव में अप्रत्याशित जीत और बिहार तथा उत्तराखण्ड में हाल में हुए उपचुनाव में अनुकूल परिणाम नहीं आने के बाद अब भाजपा का पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश के उपचुनावों पर टिक गया है और वह लोकसभा चुनाव में परवान चढ़ चुके मोदी फैक्टर को मुख्य केन्द्र बनाकर बेहद आक्रामक अंदाज में प्रचार कर रही है। दूसरी ओर, लोकसभा चुनाव में करारा झटका पायी सत्तारूढ़ सपा तथा कांग्रेस ‘मोदी फैक्टर’ को एक छलावा मात्र साबित करने की कोशिश करते हुए इसके लिये मोदी सरकार के 100 दिन के कार्यकाल को नाकामियों से भरा बताकर मोदी लहर को भ्रमजाल करार दे रही हैं।, राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अपने विधायकों के सांसद बनने के कारण रिक्त हुई सीटों को दोबारा हासिल करने के लिये बढ़-चढ़कर चुनाव प्रचार कर रही भाजपा के लिये ‘मोदी फैक्टर’ उसके मनोबल का आधार है। हालांकि यह उसके लिये शेर की सवारी करने जैसा है, क्योंकि मोदी लहर के जादू को भुनाना उसके लिये चुनौती भी है। उपचुनाव प्रचार में खासकर भाजपा और सपा के बीच जबर्दस्त होड़ हो रही है। भाजपा ने प्रचार के मैदान में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा राजनाथ सिंह समेत छह केन्द्रीय मंत्रियों की अगुवाई में 39 स्टार प्रचारकों की फौज उतारी है, वहीं सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने उपचुनाव प्रचार की कमान खुद सम्भाली है। किसी उपचुनाव में सम्भवत: ऐसा पहली बार हुआ है।
Author: JAN TV Editorial Team
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