सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले को असंवेदनशील करार देते हुए उस पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि नाबालिग लड़की का ब्रेस्ट पकड़ना और नाड़ा तोड़ना रेप की श्रेणी में नहीं आता। इस टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह बयान महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशीलता को नजरअंदाज करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में न्यायपालिका को सतर्क रहने की जरूरत है ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके। कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए मामले की दोबारा समीक्षा करने का आदेश दिया है।
यह मामला समाज में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण बहस छेड़ सकता है। इससे पहले भी कई बार अदालतों में ऐसे फैसले चर्चा का विषय बन चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से उम्मीद की जा रही है कि यौन अपराधों के मामलों में ज्यादा संवेदनशीलता और गंभीरता बरती जाएगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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