1931 में जन्मीं एलिजाबेथ सिमसन का भारत से गहरा जुड़ाव रहा। उनके परिवार के भारत से पुराने संबंध थे, जिसने उन्हें इस देश की ओर आकर्षित किया। 1970 के दशक के आखिर में उन्होंने भारत की यात्राएं शुरू कीं और इसके बाद लगभग हर साल यहां आती रहीं। इस दौरान उन्होंने खासतौर पर राजस्थान और गुजरात के गांवों का भ्रमण किया और वहां की परंपराओं, लोक जीवन, कारीगरी और संस्कृति को अपने कैमरे में कैद किया।
बीकानेर में लगी यह प्रदर्शनी ‘मलंग फोक फाउंडेशन’ द्वारा आयोजित की गई है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को उन पारंपरिक कलाओं, शिल्पों और जीवनशैली से जोड़ना है, जो धीरे-धीरे आधुनिकता की दौड़ में खोती जा रही हैं। प्रदर्शनी में ब्लैक एंड व्हाइट और रंगीन तस्वीरों के जरिए गांवों के रीति-रिवाज, पहनावा, लोक संगीत और कारीगरों के जीवन को बेहद संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
इस प्रदर्शनी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं, जिनमें लेखक, कलाकार और युवा भी शामिल हैं। जानकारों का मानना है कि यह संग्रह सिर्फ तस्वीरों का नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक दस्तावेज है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करता है।
दिलचस्प बात यह है कि एलिजाबेथ सिमसन भारत की नहीं थीं, फिर भी उन्होंने भारतीय संस्कृति को जिस गहराई और संवेदनशीलता से समझा और प्रस्तुत किया, वह अपने आप में खास है। उनके कैमरे में कैद हर तस्वीर एक कहानी कहती है और उस दौर के जीवन को सामने लाती है, जो अब तेजी से बदल रहा है।
पिछले साल एलिजाबेथ सिमसन का निधन हो गया, लेकिन उन्होंने अपने इस अनमोल संग्रह को कोटा स्थित एक सांस्कृतिक और संरक्षण समूह को दान कर दिया था, जिससे यह धरोहर अब भी लोगों तक पहुंच रही है।
यह प्रदर्शनी 10 मई तक आम जनता के लिए खुली रहेगी और उम्मीद की जा रही है कि यह पहल लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और सहेजने के लिए प्रेरित करेगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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