(India)
बल्कि वह उनसे नोट्स भी तैयार कर सकेंगे, डीयू भारत का पहला ऐसा विश्वविद्यालय है जो इस तरह की सुविधा मुहैया कराने जा रहा है,नेत्रहीनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ‘इंक्लूसिव प्रिंट एक्सेस प्रोजेक्ट’ तैयार किया गया है, दूसरे देशों से आयात किए गए कई साफ्टवेयर के समन्वय से विश्वविद्यालय के ‘इक्वल अपोर्चूनिटी सेल’ ने इस अपनी तरह की अनूठी परियोजना को मूर्त रूप दिया है, इस सेल के विशेष कार्य अधिकारी अनिल अंजेया ने बताया, ‘‘कई विश्वविद्यालयों ने नेत्रहीन छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न पहल कीं, किसी ने उनके लिए विशेष कमरे बनाए तो किसी ने उनके लिए वाचक की व्यवस्था की, लेकिन उससे उनकी उतनी मदद नहीं हो पाई, हम उन्हें ठीक वैसा ही माहौल उपलब्ध कराना चाहते हैं, जैसा दूसरे छात्रों को हासिल है.’’ सेल के एक अन्य अधिकारी विपिन तिवारी ने बताया, ‘‘हम चाहते हैं कि पढ़ाई के लिए छात्र किसी के मोहताज न रहें और स्वतंत्र रूप से अपना कार्य कर सकें, विदेशों में कुछ विश्वविद्यालयों के पास यह तकनीक है लेकिन भारत में हम पहले हैं जो छात्रों के लिए इसे मुहैया कराने वाले हैं.’’ इस तकनीक में एक उच्च क्षमता वाला कैमरा ‘लेक्सएयर’ और एक स्कैनर लगाया गया है, उन्होंने बताया, ‘‘नेत्रहीन छात्र ठीक उसी तरह से किताब पकड़ेंगे, जैसे सामान्य छात्र पकड़ते हैं और कैमरा तथा स्कैनर किताब में छपी सामग्री की छवि उतारकर उसे बोलने की तकनीक में बदल देंगे, यह साफ्टवेयर किताब की स्कैनिंग, रीडिंग, उसे पीडीएफ में बदलने और अन्य कई कामों में माहिर है, छात्र विभिन्न हिस्सों को बुक मार्क कर सकेंगे और उनके लिए नोट्स बनाने की भी जगह होगी.’’ इस प्रौद्योगिकी में केवल अंग्रेजी और हिंदी की सामग्री को बोलकर पढ़ा जा सकेगा, यह चित्र और हाथ से लिखी सामग्री को पढ़ने में सक्षम नहीं होगी
Author: JAN TV Editorial Team
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