हालांकि, कालभैरव पूजा में निशा काल का विशेष महत्व होता है, जो 9 अप्रैल की रात को पड़ रहा है। इसलिए जो श्रद्धालु रात्रि में विशेष पूजा करना चाहते हैं, वे 9 अप्रैल की रात को भी कालभैरव साधना कर सकते हैं। इस दिन सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें, मंदिर जाकर या घर पर विधि-विधान से पूजा करें, दीप-धूप अर्पित करें और भैरव चालीसा का पाठ करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। कालभैरव के वाहन माने जाने वाले कुत्ते को भोजन कराना, सरसों के तेल का दीपक जलाना और “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। सच्चे मन से की गई पूजा से भय, संकट और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।
Author: JAN TV Editorial Team
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