एआई का 'मायाजाल': क्या हम खो रहे हैं अपनी सोचने की शक्ति?
(India) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे जीवन को आसान तो बना रहा है, लेकिन इसके साथ ही एक गंभीर मानसिक संकट 'कॉग्निटिव सरेंडर' (Cognitive Surrender) भी दस्तक दे रहा है। पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के एक हालिया शोध 'थिंकिंग—फास्ट, स्लो, एंड आर्टिफिशियल' में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इंसान अब अपनी तर्क-शक्ति मशीनों को आउटसोर्स कर रहा है। शोध के अनुसार, जब एआई चैटबॉट्स आत्मविश्वास के साथ गलत जानकारी भी देते हैं, तब भी 80 प्रतिशत लोग उसे बिना किसी जांच-परख के सच मान लेते हैं। इसे वैज्ञानिकों ने 'सिस्टम 3' यानी कृत्रिम संज्ञान का नाम दिया है, जहाँ मानव मस्तिष्क सक्रिय रूप से सोचना बंद कर देता है।
इस शोध में सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई है कि एआई का उपयोग करने वाले लोगों में एक 'झूठा आत्मविश्वास' पैदा हो रहा है। एआई के बात करने का तरीका इतना प्रभावशाली होता है कि उपयोगकर्ता को लगता है कि मशीन कभी गलत नहीं हो सकती। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि एआई का उपयोग एक उपकरण (Tool) की तरह करना फायदेमंद है, लेकिन उस पर पूरी तरह निर्भरता हमारी निर्णय लेने की क्षमता को खत्म कर सकती है। भविष्य में मानसिक रूप से पंगु होने से बचने के लिए यह जरूरी है कि हम एआई द्वारा दी गई जानकारी का 'फैक्ट-चेक' करना न छोड़ें।

Author: JAN TV Editorial Team

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