गंगा दशहरा को हिंदू मान्यताओं के अनुसार मां गंगा के धरती पर अवतरण का प्रतीक माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर पुण्य अर्जित करने की परंपरा निभाते हैं। वहीं बड़ा मंगल भगवान हनुमान को समर्पित होता है, जिसे शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
इस वर्ष दोनों पर्व एक ही दिन पड़ने से इसका महत्व और बढ़ गया। प्रयागराज, वाराणसी और अयोध्या समेत कई धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। प्रयागराज स्थित बड़े हनुमान मंदिर में ‘नौतपा’ की भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ।
वाराणसी और अयोध्या के घाटों पर भी बड़ी संख्या में लोग गंगा और सरयू में स्नान करने पहुंचे। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन किए गए स्नान और दान से जीवन में पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा का धरती पर अवतरण राजा भगीरथ की कठोर तपस्या का परिणाम माना जाता है। भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर धीरे-धीरे पृथ्वी पर प्रवाहित किया था, जिससे सृष्टि का संतुलन बना रहा।
स्थानीय प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए हैं। इस दुर्लभ संयोग ने पूरे उत्तर प्रदेश में मंगलवार को धार्मिक उत्साह और आस्था का विशेष वातावरण बना दिया।
Author: JAN TV Editorial Team
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