(India)
इसे दुबड़ी सातें या दुबड़ी सप्तमी भी कहते हैं। यह त्योहार संतान की मंगलकामना के लिए किया जाता है। इस बार यह पर्व 1 सितंबर, सोमवार को है। इस दिन दुबड़ी माता की पूजा की जाती है। घर की दीवार पर दुबड़ी (कुछ बच्चों, सर्पों, मटका तथा एक औरत) का चित्र मिट्टी से बनाया जाता है। उनको चावल, जल, दूध, रोली, आटा, घी और चीनी मिलाकर लोई बनाकर उनसे पूजा जाता है, दक्षिणा चढ़ाई जाती है तथा भीगा हुआ बाजरा भोग के रूप में चढ़ाया जाता है। इसके बाद बहुएं अपनी सास के पूर छूकर आशीर्वाद लेती हैं। इस दिन दुबड़ी सातें की कहानी भी सुनी जाती है तथा ठंडा भोजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि दुबड़ी माता की विधि-विधान पूर्वक पूजा करने से उत्तम संतान प्राप्त होती है तथा वह स्वस्थ व दीर्घायु भी होती है।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।