भगवान को प्रसन्न करने के लिए फूल चढ़ाएं तो न भूले फूलों से जुड़ी ये चीजें
(India) धर्म परंपराओं में देवी-देवताओं को चढ़ाई जाने वाली पूजा सामग्रियों में फूल अर्पित करने से भी भगवान प्रसन्न होते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं शास्त्रों में बताई गई वो बातें जो किसी भी देवी या देवता को फूल चढ़ाने से पहले जरूर ध्यान में रखनी चाहिए...

- देवी-देवताओं को चढ़ाएं जाने वाले फल, फूल और पत्तों का मुंह उगते वक्त मुंह ऊपर की ओर होता है। इसलिए भगवान को चढ़ाते वक्त भी इनका मुंह ऊपर की तरफ रखना चाहिए।

- फूल चढ़ाने का सही तरीका यही होता है कि दाएं हाथ की हथेलियां ऊपर उठी हों और मध्यमा यानी मिडिल फिंगर, अनामिका यानी रिंग फिंगर और अंगूठे से फूल चढ़ाएं।

- रोज चढ़े हुए फूलों को फिर से देव मूर्ति से उतारने के लिए फूलों को अंगूठे और तर्जनी यानी इंडेक्स फिंगर की मदद से ही उतारना चाहिए।
- भगवान को ताजे फूल चढ़ाना चाहिए।

- भगवान विष्णु को धतूरा, मालती, कनेर, सेमल के फूल व अक्षत न चढ़ाएं। खासकर जब धन लाभ की कामना से पूजा की जाए।

- गणेशजी की पूजा में तुलसी न चढ़ाएं।

- भगवान शंकर को केतकी, पलास, मौलसिरी, चंपा, कुंद के फूल न चढ़ाएं।

- भगवान की उपासना में दूर्वा और मदार के फूल न चढ़ाएं।

- फूल, फल या पत्ते प्राकृतिक रूप से जिस स्थिति और दशा में हो, वैसे ही चढ़ाना चाहिए।- हिन्दू धर्म में सवेरे खासतौर पर सूर्योदय का वक्त भगवान सूर्य की उपासना से कई कामनाओं को पूरा करने के लिए शुभ माना जाता है। सौरपुराणों में लिखा गया है कि सूर्य भक्ति, चाहे वह नाम स्मरण, स्तोत्र पाठ, अभिषेक पूजा, सूर्य नमस्कार किसी भी रूप में हो उम्र, शक्ति, सेहत, ख्याति, वैभव व ज्ञान देने वाली मानी गई है। सूर्य पूजा में सुख की कामना से ही कुछ आसान उपाय भी असरदार माने गए हैं। इनमें से ही एक है - सूर्यदेव को अलग-अलग तरह के फूल चढ़ाना। हर अलग फूल का चढ़ावा विशेष फलदायी या इच्छापूर्ति करने वाला बताया गया है। यहां जानिए सवेरे सूर्य देव को कौन-सा फूल चढ़ाने से कैसा शुभ फल मिलता है।

करवीर या कनेर - अपार सुख और धन-संपत्ति, ऐश्वर्य, संकटमुक्ति।

कोई सफेद फूल - भाग्यबाधा दूर होती है।

मौलसिरी - जीवनसाथी के रूप में रूपवती कन्या मिलती है।

पलाश - अनिष्ट शांति

मन्दार - त्वचा व कुष्ठ रोग शांति
बेला या मल्लिका - सभी उत्तम सुख-सुविधाओं व वैभव की प्राप्ति।

बिल्वपत्र - सभी कामनाएं पूरी हो जाती है।

Author: JAN TV Editorial Team

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