दूं- यह दुर्गा का बीज मंत्र है। इसमें द्-दुर्गा, उ- रक्षा और बिंदु- दुखनाशक है। सार है मां दुर्गा रक्षा कर पीड़ाओं का अंत करे।श्रीं - इस लक्ष्मी बीज का मतलब है - श् - महालक्ष्मी, र-दौलत, ई - महामाया, नाद - जगतमाता और बिन्दु- दुखहर्ता । सार है ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी मेरे कष्टों को दूर करे और मेरे जीवन में ऐश्वर्य की कमी न हो।
ऐं- यह देवी सरस्वती बीज है, जिसका अर्थ है - ऐ - माता सरस्वती, नाद- जगतमाता व बिंदु- विघ्रनाशक। इस तरह पूरे बीज का मतलब है -जगतजननी मां सरस्वती मुझ पर प्रसन्न हो।
क्लीं- यह श्री कृष्ण का बीज है - जिसमें क - भगवान श्रीकृष्ण, ल- अलौकिक तेज, ई - योगेश्वर और बिंदु-पीड़ानाशक है। पूरे कृष्ण बीज का मतलब है- भगवान श्रीकृष्ण मेरी पीड़ाओं का नाश करे।
क्रीं- यह काली का बीज है- इस मंत्र में क - काली, र-प्रकृति, ई- माया, नाद- जगतमाता व बिंदु- पीडऩाशक है। सार है जगतजननी महाकाली कष्ट का अंत करे।
हौं -यह शिव बीज - इस में ह - शंकर, औ - सदाशिव , बिंदु - पीड़ानाशक है। सार है सदाशिव मेरे संताप का हरण करे।
गं- यह गणेश बीज है - जिसमें में ग्- गणपति, अ - कष्टनिवारण, बिंदु- पीड़ाहर्ता है। पूरे बीज का मतलब है। विघ्रहर्ता भगवान गणेश हमारे दु:खों का अंत करे।
हौं -यह शिव बीज - इस में ह - शंकर, औ - सदाशिव , बिंदु - पीड़ानाशक है। सार है सदाशिव मेरे संताप का हरण करे
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।