धनतेरस पर दीपक जलाने से टल जाती है मृत्यु
(India) वह अपने हाथों में अमृत कलश लिए प्रकट हुए थे। इस कारण उनका नाम पीयूषपाणि धन्वन्तरि विख्यात हुआ। धन्वन्तरि को विष्णु का अवतार भी माना जाता है। परम्परा के अनुसार धनतेरस की संध्या को यम के नाम का दीया घर की देहरी (बाहर) पर रखा जाता है और उनकी पूजा करके प्रार्थना की जाती है कि वह घर में प्रवेश नहीं करें और किसी को कष्ट नहीं पहुंचाएं। देखा जाए तो यह धार्मिक मान्यता मनुष्य के स्वास्थ्य और दीर्घायु जीवन से प्रेरित है। यम के नाम से दीया निकालने के बारे में भी एक पौराणिक कथा है कि एक बार राजा हिम ने अपने पुत्र की कुंडली बनवाई। इससे पता चला कि शादी के ठीक चौथे दिन सांप के काटने से उसकी मृत्यु हो जाएगी। हिम की पुत्रवधू को जब इस बात का पता चला तो उसने निश्चय किया कि वह हर हाल में अपने पति को यम के कोप से बचाएगी। शादी के चौथे दिन उसने पति के कमरे के बाहर घर के सभी जेवर और सोने-चांदी के सिक्कों का ढ़ेर बनाकर उसे पहाड का रूप दे दिया और खुद रात भर बैठकर उसे गाना और कहानी सुनाने लगी ताकि उसे नींद नहीं आए। रात के समय जब यम सांप के रूप में उसके पति को डंसने आया तो वह आभूषणों के पहाड़ को पार नहीं कर सका और उसी ढेर पर बैठकर गाना सुनने लगा और पूरी रात बीत गई। इसके बाद अगली सुबह सांप को लौटना पड़ा। इस तरह हिम की पुत्रवधु ने अपने पति की जान बचा ली। माना जाता है कि तभी से लोग घर की सुख-समृद्धि के लिए धनतेरस के दिन अपने घर के बाहर यम के नाम का दीया निकालते हैं ताकि यम उनके परिवार को कोई नुकसान नहीं पहुंचाए।

Author: JAN TV Editorial Team

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