- इस मंत्र को गुरु से प्राप्त करें। इससे इस मंत्र जप अधिक प्रभावी और मंगलकारी होता है।
- देवालय, तीर्थ या घर में साफ, शांत व एकांत जगह बैठकर मंत्र जप करें।
- इस मंत्र यानी नम: शिवाय के आगे हमेशा 'ॐ' लगाकर जप करें। यह षडाक्षरी मंत्र बन जाता है।
- गुरु, पति, माता-पिता के प्रति सेवाभाव और सम्मान मंत्र जप काल के दौरान न भूलें।
- नियत संख्या में पंचाक्षरी मंत्र जप की अवधि में व्यक्ति खान-पान, वाणी और इंद्रियों पर पूरा संयम रखे।
- किसी भी हिन्दू माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी पहले दिन से कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि तक मंत्र जप करें। खासतौर पर महाशिवरात्रि पर।
- हिन्दू पंचांग की अष्टमी तिथि, प्रदोष, शिवरात्रि, सावन, माघ माह और भाद्रपद माह में यह मंत्र जप बहुत शुभ और जल्द इच्छा पूरी करने वाला वाला माना गया है।
Author: JAN TV Editorial Team
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