ये तीन पुरुष नष्ट हो जाते हैं, इन्हें न सुख मिलता है और न शांति
(India) श्रीकृष्ण कहते हैं कि-

अज्ञश्चाश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति।
नायं लोकोऽस्ति न परो न सुखं संशयात्मनरू।।

इस श्लोक में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा है कि जो पुरुष अज्ञ यानी आत्म ज्ञान से हीन है, अज्ञानी है, धर्म नहीं जानता है, उपदेशों का पालन नहीं करता है, वह बहुत ही जल्दी नष्ट हो जाता है। अज्ञानी व्यक्ति कभी भी सफलता और शांति प्राप्त नहीं कर पाता है। अज्ञान के कारण ही दुखों में वृद्धि होती रहती है। अतरू हमेशा अज्ञान को दूर करने के प्रयास करते रहना चाहिए। ज्ञान प्राप्त करते रहने से कल्याण हो जाता है।

आगे जानिए इस श्लोक में बताए गए दो अन्य पुरुषों के विषय में, जो नष्ट हो जाते हैं...
नष्ट होना वाला दूसरा व्यक्ति वह है जो ज्ञान की वृद्धि करने वाले उपायों में श्रद्धा नहीं रखता है। जो व्यक्ति उपदेश देने वाले ज्ञानी लोगों के प्रति हीन भावना रखता है, भगवान के प्रति श्रद्धा नहीं रखता है, वह इंसान बहुत ही जल्दी नष्ट हो सकता है। भगवान की कृपा के बिना व्यक्ति का कल्याण नहीं हो पाता है, ऐसे लोग कभी सुख प्राप्त नहीं कर पाते हैं। यदि हम परमात्मा पर विश्वास रखते हुए सही काम करेंगे तो सफलता मिलने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं।

तीसरा व्यक्ति वह है जो हमेशा संशय में रहता है। जो पुरुष सदैव शंका में रहते हैं और कर्मों के लिए सोचते हैं कि सफलता मिलेगी या नहीं। काम होगा या नहीं। ये काम करूं या ना करूं। जो लोग भगवान की भक्ति के संबंध में भी संशय रखते हैं, वे नष्ट हो जाते हैं। संशय करने वाले व्यक्ति का मन कभी भी शांत नहीं रहता है। शंका का कोई समाधान नहीं है। अत इस भावना से जितनी जल्दी हो सके, मुक्ति पा लेनी चाहिए। कोई भी काम एक मन बनाकर शुरू कर देना चाहिए। कर्म करना हमारे वश में हैं, कर्म के फल के विषय में सोचने या शंका करने से असफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ती हैं।

श्रीकृष्ण कहते हैं कि

योगसंन्यस्तकर्माणं ज्ञानसंछिन्नसंशयम्।
आत्मवतं न कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय।।

इस श्लोक में श्रीकृष्ण ने बताया है कि जिस व्यक्ति ने आत्म ज्ञान से अपने संशय को दूर कर लिया है, उसका कल्याण हो जाता है। संशय को दूर करने के बाद व्यक्ति को शांति और सुख प्राप्त होता है। संशय यानी शंका को दूर करने के लिए हमें ज्ञान को बढ़ाते रहना चाहिए। जिस व्यक्ति ने आत्मा और ईश्वर की एकता का दर्शन कर लिया है, आत्मा और ईश्वर एक ही है, इस बात को समझ लिया है, उसके सभी संशय दूर हो जाते हैं। श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि जो व्यक्ति आत्म ज्ञान और पवित्र बुद्धि के आधार पर सही कर्म करता है, उसे किसी भी प्रकार के संशय का सामना नहीं करना पड़ता है।

Author: JAN TV Editorial Team

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