घर के वास्तु को ठीक कर सुख-समृद्धि से परिपूर्ण करता तुलसी का पवित्र पौधा
(Jaipur, Jaipur) हिंदू धर्म में धार्मिक दृष्टि से भागवत पुराण के अनुसार तुलसी को देवी की उपाधि दी गयी है | विष्णु जी के पाषाण रूप शालिग्राम की पत्नी होने के कारण उन्हें विष्णुप्रिया कहा जाता है | ऐसा माना जाता है की विष्णु जी बिना तुलसी दल के अपना भोग ग्रहण नहीं करते | तुलसी के आठ नाम - वृंदा, वृंदावनी, विश्वपूजिता, विश्वपावनी, पुष्पसारा, नन्दिनी, तुलसी और कृष्ण जीवनी से जाना जाता है |हिंदू धर्म में तुलसी को लक्ष्मी जी का वास बताया गया है.
दैविक गुण होने से यह पौधा घर के वास्तु की नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा को प्रबल करता है इसलिए घर में तुलसी का पौधा जीवन में सुख समृद्धि और खुशहाली को बढ़ता है | विज्ञान भी तुलसी के पौधे को मह्त्वपूर्ण मानता है|
घर के वास्तु दोष को भी दूर करने के लिए उपाय -
रोज़ सुबह उठ कर गंगाजल के पानी को तुलसी दल से पुरे घर में छिड़काव करना चाहिए जिससे घर का वातावरण शुद्ध हो |
रोज़ सुबह शाम को तुलसी के गमले के नीचे घी का एक दीपक ज़रूर जलना चाहिए |
रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रान्ति तथा संध्या काल में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए।
तुलसी के पत्तों को 11 दिनों तक बासी नहीं माना जाता है। भगवान को अर्पित किया जा सकता है।
शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिना नहाए ही तुलसी के पत्तों को तोड़ता है तो पूजन में ऐसे पत्ते भगवान द्वारा स्वीकार नहीं किए जाते हैं।
रोज़ तुलसी का एक पत्ता निगलने से व्यक्ति को किसी भी प्रकार का रोग नहीं होता |

Author: JAN TV Editorial Team

DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।