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अगहन मास का पहला गुरुवार की पूजा 30 नवंबर को होगी अर्थात आज ही होगी । भगवान विष्णु की पत्नी महालक्ष्मी की पूजा की परंपरा का पालन किया जाएगा। मां लक्ष्मी को आमंत्रित कर पूजा घर में स्थापित किया जाएगा | अगहन माह के सभी गुरुवार को घर-घर रंगोली सजाई जाएगी और सुबह से शाम तक तीन बार महालक्ष्मी का पूजन किया जाएगा। परंपरा के अनुसार पूजा करने से पहले अपना चेहरा 16 बार धोएं, 16 धागों वाली एक डोरी बनाएं, मंडप को केले के पत्ते और आंवले से सजाएं और दीपक जलाएं। दोपहर के समय चावल के पकवान का भोग लगाएं | शाम को आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें। पंडितों के अनुसार, इस पूजा को करने के लिए किसी ब्राह्मण या पुजारी की आवश्यकता नहीं होती है। हर कोई अपनी श्रद्धा से पूजा कर सकता है। गुरुवार को त्रिकाल (सुबह, दोपहर और शाम) पूजा करें। अगले दिन शुक्रवार को सुबह स्नान करके गौ माता की पूजा करें और उन्हें गाय को घास खिलाएं।
मां महालक्ष्मी की पूजा सामग्री
पूजा के लिए नारियल, केला, सिंघाड़ा, आंवला, बेर, सीताफल, धान की बाली, लौकी, आंवला, पान, कपड़ा, टोकरी, प्याज, तेल, घी, चीनी, चावल का आदि प्रयोग करें। आंगन से लेकर पूजा घर तक देवी लक्ष्मी के पैरों के निशान, स्वस्तिक, सांप आदि के चित्र बनाएं। दोपहर के समय चावल के पकवान का भोग लगाएं और साथ ही शाम को आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें।
Author: JAN TV Editorial Team
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