बेलपत्र इस धरती पर पाया जाने वाला एक चमत्कारी पौधा जिसका उपयोग धार्मिक होने के साथ साथ ओषधिए रूप से भी परिपूर्ण है |बिल्व का पेड़ बहुत ही पवित्र होता है। इसलिए इसे शिवद्रुम भी कहा जाता है। बिल्व का पेड़ संपन्नता का प्रतीक और समृद्धि देने वाला है। शिव पुराण के अनुसार बेलपत्र का उद्गम माता पार्वती के पसीने से हुआ था जिसकी तासीर ठंडी मानी जाती है |
बेलपत्र के चमत्कारी गुणों का वर्णन ग्रंथो में मिलता है जिससे जुडी एक कथा भी काफी प्रचलित है | ऐसा माना जाता है की जब समुद्र मंथन हुआ था तब समुद्र में से हलाहल विष निकला था जिसको तोड़ की के पास नहीं था | तब सम्पूर्ण संसार को इस कष्ट से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान् शिव सामने आये और सम्पूर्ण विष को अपने कंठ में धारण कर लिया जिससे उनका शरीर गरम होने लगा तब धीर - धीरे आसपास का वातावरण भी गरम होने लगा तब शिब जी की पीड़ा को कम करने के लिए और बेलपत्र विष के प्रभाव को कम करने के लिए माता पार्वती के साथ सभी देवी -देवताओ ने शिव जी को बेलपत्र खिलाना और बेलपत्र युक्त जल अर्पित करना शुरू किया जिसके बाद शिव जी शांत स्वरुप में आने लगे और उन्हें ठंडक महसूस होने लगी |
माता पार्वती का अंश बेलपत्र में होने से शिव जी को यह पेड़ प्रिये लगने लगा है | और तभी से शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करना शुरू किया गया और जो कोई भी शिव जी को बेलपत्र चढ़ाता है , भोलेनाथ उनकी सभी मनोकामना पुरी करते है | वही अगर शिव पूजा के लिए कई तरह की चीजें उपलब्ध न भी हो और सिर्फ एक बिल्वपत्र चढ़ा दिया जाए तो उससे पूर्ण पूजा का फल मिलता है।
Author: JAN TV Editorial Team
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