वह बताते हैं कि भगवान शिव ‘आशुतोष’ हैं, यानी थोड़ी-सी भक्ति से भी तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं। एक प्रसंग में वे बताते हैं कि भगवान श्रीराम ने भी कहा था कि मेरी भक्ति करने के लिए पहले शिव की कृपा प्राप्त करना जरूरी है, क्योंकि शिव बिना किसी दिखावे के सच्चे भक्त को अपना आशीर्वाद देते हैं।
प्रेमानंद जी के अनुसार भगवान विष्णु और भगवान शिव एक ही परम सत्ता के दो रूप हैं, और जीवन के हर क्षण में ईश्वर का स्मरण ही सच्ची साधना है। अगर कोई भक्त एकाग्रता और समर्पण के साथ शिव की भक्ति करता है, तो भगवान शंकर उसके हृदय के द्वार खोलकर उसे दिव्य अनुभूति प्रदान करते हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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